परन्तु धारा 324 छावनी अधिनियम 2006 के अन्तर्गत छावनी परिषद द्वारा विधि विरूद्ध तरीके से पारित आदेश के द्वारा अर्थदण्ड की वसूली की कार्यवाही नहीं चल सकती है।
2.
छावनी अधिनियम की धारा 284 की उपधारा 1 का उल्लघंन करने पर उपधारा 3 के तहत उस व्यक्ति को 2500 /-रू0 तक के अर्थदण्ड से दण्डित किये जाने का प्राविधान है जिसके लिये न्यायालय में गुण-दोष पर कार्यवाही होगी।
3.
इस प्रकार निम्न न्यायालय द्वारा विधि विरूद्ध तरीके से प्रश्नगत आदेश पारित किया गया है, परन्तु धारा 284 और 289 छावनी अधिनियम का उल्लघंन होने पर छावनी परिषद अलग से परिवाद न्यायालय में परिवाद योजित करने के लिये स्वतन्त्र है।
4.
छावनी परिषद के विद्वान अधिवक्ता द्वारा बहस करते हुये मेरे समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया कि छावनी अधिनियम की धारा 64 (गगपपप) के अन्तर्गत छावनी परिषद द्वारा विपक्षी-निगरानीकर्ता को नोटिस दिया गया था और नोटिस के उपरान्त वह उपस्थित नहीं हुआ।
5.
तदोपरान्त 4 जुलाई 2009 को भी विपक्षी-निगरानीकर्ता को नोटिस दिया गया कि वह 3 दिन के अन्दर पाले गये सुअरों को छावनी क्षेत्र से हटाये अन्यथा उसके उपर छावनी अधिनियम 2006 की धारा 284 के अन्तर्गत को रू0 2500 / का जुर्माना लगाया जायेगा।
6.
तदोपरान्त 4 जुलाई 2009 को भी विपक्षी-निगरानीकर्ता को नोटिस दिया गया कि वह 3 दिन के अन्दर पाले गये सुअरों को छावनी क्षेत्र से हटाये अन्यथा उसके उपर छावनी अधिनियम 2006 की धारा 284 के अन्तर्गत रू0 2500 /-का जुर्माना लगाया जायेगा।
7.
तदोपरान्त 4 जुलाई 2009 को भी विपक्षी-निगरानीकर्ता को नोटिस दिया गया कि वह 3 दिन के अन्दर पाले गये सुअरों को छावनी क्षेत्र से हटाये अन्यथा उसके उपर छावनी अधिनियम 2006 की धारा 284 के अन्तर्गत रू0 2500 /-का जुर्माना लगाया जायेगा।
8.
तदोपरान्त 4 जुलाई 2009 को भी विपक्षी-निगरानीकर्ता को नोटिस दिया गया कि वह 3 दिन के अन्दर पाले गये सुअरों को छावनी क्षेत्र से हटाये अन्यथा उसके उपर छावनी अधिनियम 2006 की धारा 284 के अन्तर्गत रू 0 2500 /-का जुर्माना लगाया जायेगा।
9.
निगरानीकर्ता द्वारा यह भी आधार लिया गया कि धारा 284, 289 छावनी अधिनियम 2006 के अधीन दण्ड देने का अधिकार केवल न्याय पालिका को है तथा छावनी परिषद के कथित अवैध अर्थदण्ड को निम्न न्यायालय अपने उक्त आदेश से वसूल नहीं कर सकती है।
10.
निगरानीकर्ता के विद्वान अधिवक्ता द्वारा मेरे समक्ष बहस करते हुये यह तर्क प्रस्तुत किया कि निम्न न्यायालय द्वारा अपने आदेश में छावनी अधिनियम 2006 की धारा 64 (गगपपप) के अधीन छावनी परिषद को अर्थदण्ड देने का अधिकार माना है जबकि उक्त धारा में ऐसा कोई प्राविधान नहीं है।